प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय
इस संस्था की स्थापना प्रजापिता ब्रह्मा, जो दादा लेखराज के नाम से जाने जाते थे, द्वारा सन् 1937 में अविभाजित भारत के हैदराबाद, सिंध प्रांत में की गई थी, जोकि बाद में सन् 1950 में, माउंट आबू, राजस्थान, भारत में स्थानांतरित कर दिया गया। आज अपने ही तरह का यह अनूठा आध्यात्मिक संगठन; पूरी दुनिया के 5 महाद्वीपों और 110 से अधिक देशों में अपनी पहचान और सफलता का परचम लहरा रहा है और समाज के लगभग सभी वर्गों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है। इस संगठन के आध्यात्मिकज्ञानकीयात्रा माउंट आबू से शुरू होकर धीरे-धीरे देश के विभिन्न हिस्सों में कईं शाखाओ के रूप में फैल गईं। इसके बाद सन् 1971 में, इस संस्था के राजयोग का आध्यात्मिक ज्ञान का अभ्यास विदेशों तक भी पहुंच गया, और ब्रह्माकुमारीज़ का पहला सेंटर लंदन में शुरु हुआ।
संस्था के संस्थापकप्रजापिताब्रह्मापरमात्मा द्वारा विश्व में शांति, पवित्रता और संपन्नता को पुनः स्थापित करने के कार्य में सदा आगे रहे और तन, मन, धन से इस ईश्वरीय कार्य के प्रति समर्पित रहे। इस संस्था का मूलउद्देश्य; सम्पूर्ण मानव प्रजाति को अज्ञानता, दुख तथा नैतिक पतन से ऊपर उठाने और ईश्वर द्वारा प्राप्त आध्यात्मिक ज्ञान संदेशों के माध्यम से जागृति लाने हेतु स्थापित किया गया था। क्योंकि हमारे स्वयंकेपरिवर्तनसेहीविश्वपरिवर्तन संभव है।
साथ ही विश्व की एकमात्र महिला नेतृत्व वाली यह संस्था “यूनाइटेडनेशंसडिपार्टमेंटऑफपब्लिकरिलेशन” से संबद्ध एक अन्तर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन के रूप में काम कर रही है जो प्रत्येक व्यक्ति को उसकी श्रेष्ठ वास्तविक पहचान; शांति और गरिमा के आधार पर स्वयं के मूल स्वरूप को पहचानने और बदलने के प्रति समर्थन करती है।
ब्रह्माकुमारीज़ विश्व का एकमात्र महिलाओं के नेतृत्व वाला संगठन है। यद्यपि इसके संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा थे, परंतु इस महिला संगठन की पहली प्रशासनिक प्रमुख “मातेश्वरी जगदम्बा” थीं, जिन्हें प्यार से सभी “मम्मा” कहकर बुलाते थे।
1965 में मातेश्वरी जगदम्बा और 1969 में प्रजापिता ब्रह्मा के शरीर त्यागने और अव्यक्त रूप में स्थित होने के बाद, राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी को संस्था का अगला प्रशासनिक प्रमुख नियुक्त किया गया, जिन्होंने इस संगठन की सेवाओं का विस्तार पूरे भारत वर्ष और विश्व के 136 देशों में अति गौरवपूर्ण और प्रभावशाली तरीके से किया।
और जब 2007 में राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी ने अपने नश्वर शरीर का त्याग किया तब राजयोगिनी दादी जानकी जी को मुख्य प्रशासनिक प्रमुख बनाया गया, जिन्होंने विश्व के लगभग सभी देशों में परमात्म संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दादी जानकी जी ने अपनी अथक मेहनत और समर्पण के साथ इस संस्था का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया और वर्ष 2020 में 104 वर्ष की आयु में अव्यक्त अवस्था को प्राप्त किया।
बाद में, दादी हृदयमोहिनी जी जिनको प्यार से सभी दादी गुलजार कहकर बुलाते थे, को ब्रह्माकुमारीज़ का मुख्य प्रशासनिक प्रमुख नियुक्त किया गया। दादी गुलजार जी को स्वयं परमात्मा ने अपने संदेशवाहक के रूप में चुना था। परमातम ज्ञान और शिक्षाओं को अति सुंदर रूप में और प्रसन्नचित अवस्था में स्थित होकर अपनी सेवाओं का निर्वहन करते हुए दादी गुलजार ने वर्ष 2021 में शरीर त्यागा।
उनके पश्चात दादी रतन मोहिनी जी ने अथक निष्ठा के साथ नेतृत्व किया और 8 अप्रैल 2025 को 101 वर्ष की आयु में अपना देह-त्याग कर अव्यक्त अवस्था को प्राप्त किया।। वर्तमान में आदरणीय मोहिनी दीदी जी संस्था की प्रशासनिक प्रमुख के रूप में, आध्यात्मिक ज्ञान और अटूट संकल्प के साथ संगठन का मार्गदर्शन कर रही हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का वृहद वृक्ष और शाखाएँ
ब्रह्माकुमारीज़ संस्था एक विशेष उद्देश्य के साथ गठित कुछ सहयोगी संस्थानों की मदद से, अपनी विभिन्न सामाजिक-आध्यात्मिक भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ निभाती है। हालाँकि इन सभी संस्थानों का एकमात्र लक्ष्य राजयोग के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना है, परंतु इस विशाल वृक्ष की प्रत्येक कार्यकारिणी शाखा इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर, अपने उपसंस्थान द्वारा निर्धारित गाइडलाइन्स के अनुसार कार्य क्रियान्वित करती है। आइए ब्रह्माकुमारीज़ के प्रमुख सहयोगी संस्थानो के बारे में जानते हैं:

विश्वनवीकरणआध्यात्मिकट्रस्ट (डब्लूआरएसटी)
यह संस्था सन् 1968 में एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर की गई थी, जिसका मुख्य कार्यालय मुंबई में है। इस उप संस्थान के उद्देश्य व लक्ष्य थे:
- प्राचीन भारतीय की संस्कृति, ज्ञान, योग एवं दर्शन का प्रचार, प्रसार एवं अनुसंधान करना।
- ज्ञान प्रदान करने, चरित्र को और मानव जीवन को बेहतर बनाने पर विशेष जोर देने के साथ साथ संग्रहालयों, प्रदर्शनियों और सेमिनारों की व्यवस्था और प्रबंधन करना।
उपरोक्त उद्देश्य के अलावा, यह उप संस्थान अध्ययन और शिक्षण के साथ-साथ संस्थानों की स्थापना और उनके समुचित प्रबंधन के लिए प्रावधान भी करता है।

राजयोगएजुकेशनएंडरिसर्चफाउंडेशन (आरईआरएफ)
इस संस्थान को 11 अगस्त 1982 में, एक शैक्षिक और धर्मार्थ सोसायटी के रूप में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, XXI के तहत पंजीकृत किया गया था। यह अपने 20 संघटक विंग्स की मदद से कई प्रकार की जिम्मेदारियां निभाती है। यह सभी विंग हमारे समाज के विशिष्ट वर्गों की सेवा के लिए समर्पित हैं। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
- राजयोग केन्द्रों की स्थापना एवं राजयोग शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना
- आत्मिक-चेतना के ज्ञान का प्रसार करना और यूनिवर्सल भाईचारे का समर्थन करना
- साक्षरता को बढ़ावा देना और राजयोग में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना

प्रशासक सेवा प्रभाग

कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग

कला एवं संस्कृति प्रभाग

व्यापार एवं उद्योग प्रभाग

शिक्षा प्रभाग

सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग

न्यायाविद् प्रभाग

मीडिया प्रभाग

चिकित्सा प्रभाग

राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग

धार्मिक प्रभाग

वैज्ञानिक एवं अभियंता प्रभाग

सुरक्षा सेवा प्रभाग

शिपिंग, एविएशन और टूरिज्म प्रभाग

समाज सेवा प्रभाग

स्पार्क प्रभाग

खेल प्रभाग

यातायात प्रभाग

महिला प्रभाग

युवा प्रभाग

ब्रह्माकुमारीज़एजुकेशनसोसायटी (बीकेईएस)
यह संस्थान दिनांक 18-11-1996 को बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950 (1950 का अधिनियम संख्या 29) के प्रावधानों के तहत एक शैक्षिक और धर्मार्थ समाज के रूप में पंजीकृत है, जिसका मुख्य कार्यालय मुंबई में स्थित है। संस्थान के मुख्य उद्देश्य हैं:
- आध्यात्मिक शिक्षा संस्थानों की स्थापना, संचालन, और प्रबंधन करना
- नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से संबंधित शिक्षा प्रदान करना
- वैज्ञानिक सोच और आध्यात्मिक दृष्टि को बढ़ावा देना
- समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए भावनात्मक संतुलन और आत्म-संयम को बढ़ावा देना और इससे संबंधित प्रशिक्षण आयोजित करना

रेडियोमधुबनकम्युनिटीसोसाइटी (आरएमसीएस)
यह संस्थान अप्रैल 2013 में, एक शैक्षिक और धर्मार्थ सोसाइटी के रूप में दिल्ली में पंजीकृत किया गया था। इसके लक्ष्य और उद्देश्य हैं:
- नई संचार तकनीकों के साथ सामुदायिक सेवाएं प्रदान करना
- शिक्षा; विशेषकर वैल्यूज और आध्यात्मिक शिक्षा को आगे बढ़ाना
- रेडियो प्रसारण स्टेशन की स्थापना, प्रबंधन और संचालन करना
- अन्धविश्वास, नैतिक एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर करना
- पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी पैदा करना
- नशामुक्ति आदि उद्देश्यों के लिए कार्य करना
संयुक्त राष्ट्र में ब्रह्माकुमारीज़ की भूमिका
ब्रह्माकुमारीज़ संयुक्त राष्ट्र का एक अन्तर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है। यह संगठन 137 देशों में अपने अन्तर्राष्ट्रीय केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से, लोगों को उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मामलों पर अपनी राय व्यक्त करने के अवसर प्रदान करती है और सुनिश्चित करती है कि उनके द्वारा लिखित और मौखिक संदेश बयानों या फिर अन्य किसी पब्लिकेशन के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों और बैठकों में प्रस्तुत किए जाएं।
ब्रह्माकुमारीज़ के सिद्धांत, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के चार्टर की प्रस्तावना में निहित सिद्धातों के अनुसार हैं जिनके अनुसार “…मानव जाति की गरिमा और वैल्यूज को बनाए रखने के लिए मौलिक अधिकारों में विश्वास को पुख्ता करना…।” और… “संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों को उजागर करने हेतु जागरूकता को बढ़ावा देना…”।

सन् 1984 में दादी प्रकाशमणि जी को यू.एन की तरफ़ से शांति पदक से नवाज़ा गया

1987 में यूनाइटेड नेशंस के “शांति वर्ष” के उपलक्ष्य में ब्रह्मकुमारीज के महत्वपूर्ण योगदान के लिए, 7 शांति दूत पुरस्कार से सम्मानित किया गया

यूनाइटेड नेशंस ने शांति की संस्कृति (2000) को बढ़ावा देने के लिए “मेनिफेस्टो 2000” के अंतर्गत ब्रह्मा कुमारिज मैसेंजर को नामित किया।
यूनाइटेड नेशंस (संयुक्त राष्ट्र) के साथ ब्रह्माकुमारीज का जुड़ाव

1980 से
डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इनफॉर्मेशन (डीपीआई) की सहयोगी संस्था

1983 से
इकनॉमिक एंड सोशल काउंसिल (ईसीओएसओसी) के साथ जनरल परामर्शदात्री संस्था

1987 से
यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेंस एजुकेशन फंड (यूनिसेफ) के साथ परामर्शदात्री संस्था

2007 से
ग्रामीण लोगों के लिए शिक्षा, खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की प्रमुख सदस्य

2009 से
जलवायु परिवर्तन पर यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन का पर्यवेक्षक संगठन (यूएनएफसीसीसी)

2014 से
यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंट एसेंबली में पर्यवेक्षक संगठन (यूएनईपी)
साथ ही ब्रह्माकुमारीज़संगठन, संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए; संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कार्यक्रमों- जागरूकता, दृष्टिकोण, विजन, मिलेनियम डेवलपमेंट गोल के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु कार्रवाई करना, जलवायु परिवर्तन, खाद्य संकट, जेंडर इक्वालिटी, समानता, वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य, मानवीय आपात स्थितियाँ, मानवाधिकार, महिलाएँ, बच्चे, युवा, अन्तर्राष्ट्रीय दशक, दिन आदि में योगदान देती है।
इसके साथ ब्रह्माकुमारीज़संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों, तैयारी समिति की बैठकों, मौखिक और लिखित बयान प्रस्तुत करने वाले आयोगों का हिस्सा होने के साथ साथ, पैरालेल इवेंट्स की मेजबानी करना; एनजीओ समितियों और कॉकस के साथ काम करना, आदि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।




